राजस्थान पंचायत चुनाव: 1.85 करोड़ युवा तय करेंगे ‘गांव की सरकार’, चौपाल से लेकर सरपंची तक चलेगा युवा एजेंडा

राजस्थान पंचायत चुनाव: 1.85 करोड़ युवा तय करेंगे ‘गांव की सरकार’, चौपाल से लेकर सरपंची तक चलेगा युवा एजेंडा

बालकृष्ण शुक्ला/सच पत्रिका न्यूज़
जयपुर।
राजस्थान में निकाय चुनावों के बाद अब ग्रामीण अंचल में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और इस बार गांव की सरकार तय करने में सबसे बड़ा सियासी फैक्टर युवा वोटर बनकर उभरा है। राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के मुताबिक, कुल 4.03 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.85 करोड़ वोटर 18 से 35 वर्ष की उम्र के हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि पंचायत चुनाव में हर 100 में से करीब 46 वोटर युवा हैं। राज्य में कुल 4,03,07,308 मतदाताओं में 2,08,87,351 पुरुष, 1,94,19,789 महिला और 168 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इनमें 18 से 25 वर्ष आयु के 76.24 लाख तथा 26 से 35 वर्ष के 1.08 करोड़ से अधिक युवा मतदाता हैं। लगभग 14 लाख युवा पहली बार वोट डालेंगे, जिनका स्थानीय लोकतंत्र में यह पहला सीधा अनुभव होगा। चुनावी समर में उतरे प्रत्याशियों के लिए यह युवा वर्ग निर्णायक साबित होगा क्योंकि इस बार चुनाव सिर्फ सरपंच चुनने का नहीं, बल्कि गांव के युवाओं की शिक्षा, रोजगार और भविष्य की आवाज उठाने का मंच बन चुका है।

उम्र के अनुसार प्राथमिकताओं का विभाजन
​पंचायत चुनाव में युवा मतदाताओं का वर्ग एक समान वोट बैंक नहीं है, बल्कि आयु वर्ग के आधार पर उनकी प्राथमिकताएं और जरूरतें साफ तौर पर बंटी हुई हैं। 18 से 25 वर्ष आयु के युवाओं के लिए कॉलेज, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, कोचिंग संस्थान और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी सबसे प्रमुख मुद्दे हैं। वहीं दूसरी तरफ, 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग का युवा अपनी आजीविका, खेती, छोटे व्यापार, परिवार के भरण-पोषण, आवास और स्थायी आय के साधनों को लेकर ज्यादा चिंतित नजर आता है। शहरी निकायों से लौटकर ग्रामीण राजनीति में आते ही चुनावी एजेंडा भी बदल गया है। शहरों के ट्रैफिक, सीवरेज व स्ट्रीट लाइट के मुकाबले अब गांव में खेती, सिंचाई, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य और इंटरनेट प्राथमिक जरूरत बन गए हैं। आज के ग्रामीण युवा के लिए इंटरनेट सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ऑनलाइन पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन, बैंकिंग और रोजगार संबंधी जानकारी का मुख्य जरिया बन चुका है। साथ ही, गांव से शहरों की तरफ हो रहा पलायन एक बड़ा सवाल है; युवा चाहते हैं कि कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, पशुपालन और कौशल विकास के अवसर गांव में ही उपलब्ध हों ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े।
​युवा महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका
​पंचायत चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी करीब 48.18 प्रतिशत है, जिससे युवा महिला वोटर चुनावी समीकरण बदलने की पूरी ताकत रखती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा, सुरक्षित परिवहन, बालिका छात्रावास, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार के अवसर और डिजिटल सुविधाएं मुख्य मुद्दे बन चुके हैं। हालांकि 1.85 करोड़ युवा मतदाताओं का यह बड़ा आंकड़ा राजनीतिक दलों और स्थानीय प्रत्याशियों को स्पष्ट संदेश दे रहा है कि युवा मतदाता किसी एक दल या पारंपरिक मुद्दे के पक्ष में बंधा नहीं है। स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की साफ छवि, विकास के प्रति सोच, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सरकारी योजनाओं का धरातल पर असर ही इस विशाल युवा वर्ग के मतदान को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा।

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